Tuesday, June 23, 2020

Dainik Bhaskar बिहार में37 साल की पुलिस की नाैकरी में 64 एनकाउंटर करने वाले रिटायर डीएसपी कृष्ण चंद्रा ने लाइसेंसी पिस्टल से गाेली मारकर खुदकुशी कर ली। राज्य मेंचंद्रा एनकाउंटर स्पेशलिस्टइंस्पेक्टर के नाम से चर्चित थे। उन्होंने परिवार और पुलिस महकमे के लिए एक सुसाइड नोट छोड़ा है, इसमें डीएसपी चंद्रा (68 साल)ने गंभीरडिप्रेशन का शिकार होने का जिक्र किया। वे 16 साल से बीमारी का इलाज करा रहे थे, लेकिन इससे उबर नहीं पाए। चंद्रा ने पत्नी और तीन बच्चोंके नाम नाेट में लिखा है- मुझे माफ कर देना। डिप्रेशन के कारण महीनों से साेया नहीं हूं। अब मुझसे यह दुख बर्दाश्त नहीं हाे रहा। इसलिए मैं यह कदम उठाने पर मजबूर हूं। छाेटे बेटे बंटी काे लिखा है कि तुम्हेएसबीआई ब्रांच जाकर मेरी पेंशन बंद करवानी हाेगी। मां की पेंशन चालू करवानी हाेगी। मेरा माेबाइल चालू रखना हाेगा क्याेंकि बैंक, गैस, बिजली और इनकम टैक्स के लिए यह जरूरी है। वहीं, बेउर थानेदार काे संबाेधित करते हुए लिखा- मैं पिछले 16 साल से गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हूं। काफी इलाज करवाया पर सभी बेअसर रहा। काॅलाेनी के संताेष सिन्हा कीप्रताड़ना के कारण मेरा डिप्रेशन चरम पर पहुंच गया। उनकी प्रताड़ना के कारण आत्महत्या कर रहा हूं। चंद्रा काे ड्यूटी पर 2 बार गाेली लगी पर बच गए डीएसपी चंद्रा बेउर थाना के मित्रमंडल काॅलाेनी फेज-2 में रहते थे। वे एसटीएफ के डीएसपी रहे। साेनपुर में रेल डीएसपी से 2012 में रिटायर हुए। उन्हें ड्यूटी के दाैरान 2 बार गाेली भी लगी पर बच गए थे। उनके बेटेबंटी ने बताया कि मंगलवार सुबह मां नीचे थी। मैं पापा के बेड रूम के बगल वाले कमरे में था। करीब 8 बजे गाेली चलने की आवाज सुनाई दी। पापा के रूम में गए ताे देखा कि वे फर्श पर पड़े थे। पास में उनकीपिस्टल पड़ी थी। जहां भी पाेस्टिंग रही, अपराधियाें से लाेहालिया चंद्रा के दाेस्त रिटायर्ड डीएसपी अंजनी कुमार सिन्हा ने बताया- 1975 में मेरे साथ ही दाराेगा बहाल हुए। चंद्रा1985 में इंस्पेक्टर और 1998 में डीएसपी बने। उनकी जहां भी पाेस्टिंग रही, अपराधियाें से लाेहा लिया। वे गरीबाें के मददगार थे। जुल्म का शिकार काेई गरीब उनके पास आता ताे वे फाैरन एक्शन में आते थे। वे गरीबाें के साथ धरने पर भी बैठ जाते थे। कई बच्चियाें की शादी कराई और गरीब बच्चाें काे किताबें बांटी थीं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें डीएसपी कृष्ण चंद्रा के दोस्त ने बताया- एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चंद्रा की जहां भी पोस्टिंग रही, उन्होंने अपराधियों से लोहा लिया। (फाइल) दैनिक भास्कर,,1733 /local/bihar/patna/news/retired-dsp-shot-himself-dead-in-beur-who-did-64-encounters-127441452.html https://ift.tt/2AVfp1j Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf 64 एनकाउंटर करने वाले बिहार के रि. डीएसपी ने खुद को गोली मारी, सुसाइड नोट में लिखा- डिप्रेशन के कारण महीनों से सोया नहीं हूं

बिहार में37 साल की पुलिस की नाैकरी में 64 एनकाउंटर करने वाले रिटायर डीएसपी कृष्ण चंद्रा ने लाइसेंसी पिस्टल से गाेली मारकर खुदकुशी कर ली। राज्य मेंचंद्रा एनकाउंटर स्पेशलिस्टइंस्पेक्टर के नाम से चर्चित थे। उन्होंने परिवार और पुलिस महकमे के लिए एक सुसाइड नोट छोड़ा है, इसमें डीएसपी चंद्रा (68 साल)ने गंभीरडिप्रेशन का शिकार होने का जिक्र किया। वे 16 साल से बीमारी का इलाज करा रहे थे, लेकिन इससे उबर नहीं पाए।

चंद्रा ने पत्नी और तीन बच्चोंके नाम नाेट में लिखा है- मुझे माफ कर देना। डिप्रेशन के कारण महीनों से साेया नहीं हूं। अब मुझसे यह दुख बर्दाश्त नहीं हाे रहा। इसलिए मैं यह कदम उठाने पर मजबूर हूं। छाेटे बेटे बंटी काे लिखा है कि तुम्हेएसबीआई ब्रांच जाकर मेरी पेंशन बंद करवानी हाेगी। मां की पेंशन चालू करवानी हाेगी। मेरा माेबाइल चालू रखना हाेगा क्याेंकि बैंक, गैस, बिजली और इनकम टैक्स के लिए यह जरूरी है।

वहीं, बेउर थानेदार काे संबाेधित करते हुए लिखा- मैं पिछले 16 साल से गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हूं। काफी इलाज करवाया पर सभी बेअसर रहा। काॅलाेनी के संताेष सिन्हा कीप्रताड़ना के कारण मेरा डिप्रेशन चरम पर पहुंच गया। उनकी प्रताड़ना के कारण आत्महत्या कर रहा हूं।

चंद्रा काे ड्यूटी पर 2 बार गाेली लगी पर बच गए

डीएसपी चंद्रा बेउर थाना के मित्रमंडल काॅलाेनी फेज-2 में रहते थे। वे एसटीएफ के डीएसपी रहे। साेनपुर में रेल डीएसपी से 2012 में रिटायर हुए। उन्हें ड्यूटी के दाैरान 2 बार गाेली भी लगी पर बच गए थे। उनके बेटेबंटी ने बताया कि मंगलवार सुबह मां नीचे थी। मैं पापा के बेड रूम के बगल वाले कमरे में था। करीब 8 बजे गाेली चलने की आवाज सुनाई दी। पापा के रूम में गए ताे देखा कि वे फर्श पर पड़े थे। पास में उनकीपिस्टल पड़ी थी।

जहां भी पाेस्टिंग रही, अपराधियाें से लाेहालिया
चंद्रा के दाेस्त रिटायर्ड डीएसपी अंजनी कुमार सिन्हा ने बताया- 1975 में मेरे साथ ही दाराेगा बहाल हुए। चंद्रा1985 में इंस्पेक्टर और 1998 में डीएसपी बने। उनकी जहां भी पाेस्टिंग रही, अपराधियाें से लाेहा लिया। वे गरीबाें के मददगार थे। जुल्म का शिकार काेई गरीब उनके पास आता ताे वे फाैरन एक्शन में आते थे। वे गरीबाें के साथ धरने पर भी बैठ जाते थे। कई बच्चियाें की शादी कराई और गरीब बच्चाें काे किताबें बांटी थीं।



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डीएसपी कृष्ण चंद्रा के दोस्त ने बताया- एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चंद्रा की जहां भी पोस्टिंग रही, उन्होंने अपराधियों से लोहा लिया। (फाइल)


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